सारंगढ़-बिलाईगढ़, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ पुलिस के निर्देश पर जिले में चल रहे साइबर जागृति अभियान के चौथे सप्ताह में शुक्रवार को व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत जिले के थाना, चौकी, गांव, स्कूल एवं कॉलेज सहित करीब 67 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर 6097 लोगों को साइबर अपराधों और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
अभियान आगामी 2 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इस सप्ताह का मुख्य विषय “स्मार्टफोन की प्राइवेसी और सुरक्षित इंटरनेट” रखा गया है। पुलिस टीमों ने लोगों को साइबर ठगी के बदलते तरीकों की जानकारी देते हुए सतर्क रहने की अपील की।
फर्जी लोन ऐप और बिजली बिल के नाम पर ठगी से सावधान

पुलिस ने बताया कि तत्काल लोन देने का दावा करने वाले फर्जी मोबाइल ऐप से सावधान रहें। ऐसे ऐप के जरिए मोबाइल का निजी डेटा चोरी कर उसका दुरुपयोग और ब्लैकमेलिंग की जा सकती है। इसी तरह बिजली बिल अपडेट करने या बिल जमा नहीं करने पर कनेक्शन काटने का डर दिखाकर भेजे जाने वाले फर्जी मैसेज और लिंक पर भरोसा नहीं करने की अपील की गई।
सरकारी नौकरी और पार्ट टाइम जॉब के नाम पर ठगी
पुलिस ने बताया कि घर बैठे पार्ट टाइम नौकरी कर हजारों रुपये कमाने तथा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे लुभावने ऑफरों की सत्यता जांचे बिना किसी व्यक्ति को पैसा या निजी जानकारी नहीं देने की सलाह दी गई।
पार्सल में ड्रग्स बताकर डराते हैं ठग

यदि किसी व्यक्ति को फोन कर यह कहा जाए कि उसके नाम से आए पार्सल में ड्रग्स या कोई अवैध सामान मिला है और कस्टम अथवा जांच एजेंसी की कार्रवाई से बचने के लिए पैसे जमा करने होंगे, तो ऐसे कॉल से घबराने की जरूरत नहीं है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कॉल साइबर ठगी का हिस्सा हो सकते हैं। किसी जांच एजेंसी द्वारा इस तरह ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहा जाता।
एआई और डीपफेक से भी रहें सतर्क
पुलिस ने लोगों को एआई और डीपफेक तकनीक से होने वाली ठगी के प्रति भी आगाह किया। ठग अब किसी परिचित की आवाज या वीडियो जैसी सामग्री तैयार कर परिजनों से तत्काल पैसे की मांग कर सकते हैं। ऐसे मामलों में बिना सत्यापन के पैसा भेजने के बजाय संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर वास्तविकता की पुष्टि करने की सलाह दी गई।
ओटीपी और यूपीआई पिन कभी साझा न करें
जागरूकता कार्यक्रमों में लोगों को बताया गया कि ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, बैंक खाते की जानकारी या अन्य निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। अनजान और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचें।
पुलिस ने अपील की कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी थाने को भी इसकी सूचना दें। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी की जानकारी जितनी जल्दी मिलेगी, ठगी गई रकम को बैंकिंग माध्यम से रोकने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।

