कोरबा – जिले में एक बार फिर भू-विस्थापितों का गुस्सा सामने आ रहा है। दर्जनों गांवों के प्रभावित लोगों ने SECL प्रबंधन को साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें तय समय सीमा में पूरी नहीं हुईं, तो 30 मार्च से कुसमुंडा कोल उत्पादन कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इस संबंध में 16 मार्च को ही प्रबंधन को अल्टीमेटम सौंपा जा चुका है।
दरअसल, कोरबा जिले के कई गांवों के लोग वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से जन्म अर्जन प्रकरणों का निराकरण और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था शामिल है। भू-विस्थापितों का कहना है कि कोयला खनन परियोजनाओं के कारण उनकी जमीन और आजीविका प्रभावित हुई, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवजा और रोजगार के अवसर नहीं मिल पाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार SECL प्रबंधन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
भू-विस्थापितों ने 16 मार्च को SECL प्रबंधन को 15 दिनों का समय देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अगर इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 30 मार्च, सोमवार से कुसमुंडा कोल उत्पादन कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि आंदोलन के दौरान यदि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रशासन की होगी। इस घोषणा के बाद प्रशासन और प्रबंधन के सामने स्थिति को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
अब सभी की निगाहें SECL प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह इस अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में कोरबा में बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, भू-विस्थापितों के इस ऐलान ने जिले में हलचल बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि 30 मार्च से पहले प्रशासन और SECL प्रबंधन कोई ठोस पहल करता है या फिर आंदोलन की चिंगारी और भड़कती है।


