सरसीवां — थाना क्षेत्र के ग्राम ओढ़काकन स्थित महानदी घाट में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि लोडर मशीनों के जरिए महानदी से रेत निकाली जा रही है और ट्रैक्टरों के माध्यम से उसका परिवहन किया जा रहा है। वहीं सरसीवां-जैतपुर मार्ग पर बड़े हाइवा वाहनों से बिना रॉयल्टी रेत परिवहन किए जाने की भी चर्चा है।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि ओढ़काकन घाट में रेत का यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है। आरोप यह भी है कि बरसात से पहले बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के जरिए नदी से रेत निकालकर नदी किनारे डंप की जाती है और बाद में मोटी कीमत पर बेची जाती है। इससे शासन को राजस्व नुकसान के साथ क्षेत्र की सड़कों पर भी भारी वाहनों की आवाजाही का असर पड़ रहा है।

कार्रवाई पर भी उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय से अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो कार्रवाई केवल कभी-कभार तक सीमित क्यों दिखाई देती है?
सोमवार को दूरभाष के माध्यम से जब माइनिंग विभाग से ओढ़काकन क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई की जानकारी ली गई, तो माइनिंग अधिकारी ने बताया कि एक लोडर और कुछ ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर उन्हें सरसीवां थाने के सुपुर्द किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि यदि विभाग को कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन की जानकारी मिल रही है, तो फिर पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी क्यों नहीं हो रही?
सालों से चल रहा खेल, फिर कार्रवाई इतनी कम क्यों?
ओढ़काकन महानदी घाट में रेत उत्खनन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी सामने आ रहा है कि क्या विभाग को पूरे मामले की जानकारी नहीं है, या फिर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी नहीं है?
वहीं बिना ठोस प्रमाण के किसी विभागीय अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायतों और लगातार सामने आ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूर जरूरी है।
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहता है या ओढ़काकन महानदी घाट में कथित अवैध रेत उत्खनन, डंपिंग और परिवहन की पूरी श्रृंखला की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।


