सरसीवां – सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के मंडलपुर (घरजरा) स्थित वन विभाग चेकपोस्ट पर बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। अवैध धान और लकड़ी की तस्करी रोकने के उद्देश्य से बनाए गए इस चेकपोस्ट पर रात के समय कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब नाके पर ही कोई तैनात नहीं है, तो अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अवैध धान एवं लकड़ी की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं, लेकिन मंडलपुर चेकपोस्ट की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली पाई गई। सूचना मिलने पर जब मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया, तो पूरी चौकी सुनसान और अंधेरे में डूबी हुई नजर आई। न तो धान रोकथाम से जुड़े कर्मचारी मौजूद थे और न ही वन विभाग का कोई स्टाफ तैनात मिला।
मामले की जानकारी तत्काल सरसीवां तहसीलदार एवं वन विभाग के रेंजर को दी गई। इस संबंध में तहसीलदार ने बताया कि चेकपोस्ट पर कोटवार, ग्राम सचिव और रोजगार सहायक की ड्यूटी लगाई गई है, जो भोजन करने के लिए गांव गए हुए थे। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराए जाने की बात कही। वहीं, वन विभाग के रेंजर ने भी कर्मचारियों के बाहर होने की पुष्टि करते हुए स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया।
हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या भोजन के नाम पर चेकपोस्ट को पूरी तरह खाली छोड़ देना उचित है? और क्या इसी तरह की लापरवाही का फायदा उठाकर अवैध धान और लकड़ी का परिवहन बेरोकटोक जारी है? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है।


