सरसींवा – नगर पंचायत सरसींवा के अटल परिसर, भाटापारा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान महायज्ञ के तृतीय दिवस का आयोजन दिव्यता, शांति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातः से ही कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गीता ज्ञान का श्रवण किया।

इस अवसर पर योगशक्तित ब्रह्माकुमारी उमा दीदी जी (सरसींवा) ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मानव जीवन तनाव, अशांति और असंतुलन से ग्रस्त है, जिसका मूल कारण आत्मज्ञान का अभाव है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भगवद् गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य कला है, जो हर परिस्थिति में सही मार्गदर्शन देती है।
तृतीय दिवस के विषय “सांख्य योग – आत्मज्ञान एवं स्थिर बुद्धि” पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि जब मनुष्य स्वयं को देह नहीं, बल्कि आत्मा समझकर जीवन जीता है, तब उसके विचार, व्यवहार और कर्म स्वतः शुद्ध होने लगते हैं। आत्मा और परमात्मा के सच्चे संबंध से ही स्थायी सुख, शांति और शक्ति की अनुभूति होती है।
दीदी जी ने सरल उदाहरणों के माध्यम से भगवद् दर्शन का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट करते हुए कहा कि आज मनुष्य बाह्य साधनों में सुख खोज रहा है, जबकि गीता हमें अंतर की यात्रा सिखाती है। राजयोग ध्यान के नियमित अभ्यास से मन की चंचलता समाप्त होती है, बुद्धि स्थिर होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को राजयोग ध्यान का संक्षिप्त अभ्यास भी कराया, जिससे पूरा पंडाल शांति और मौन से भर गया। ध्यान के पश्चात श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति का अनुभव किया।
कार्यक्रम में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से आए माताओं-बहनों, युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की विशेष उपस्थिति रही। सभी ने गीता ज्ञान को दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। अंत में आयोजकों ने ब्रह्माकुमारी उमा दीदी जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि यह सात दिवसीय श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान महायज्ञ प्रतिदिन सायं 4 बजे से 6 बजे तक अटल परिसर, भाटापारा (सरसींवा) में आयोजित किया जा रहा है।


