बोत्सवाना ने प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत भारत को आज प्रतीकात्मक रूप से चीते सौंपे
दिनांक: 13 नवम्बर 2025| स्थान: गैबोरोन (बोत्सवाना)
भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण सहयोग को एक नया आयाम मिला है। बोत्सवाना ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण के तहत आज भारत को आठ चीते औपचारिक रूप से सौंपे। यह सौंपना राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना यात्रा के दौरान प्रतीकात्मक रूप से सम्पन्न हुआ।
वन्यजीव संरक्षण में नई साझेदारी
बोत्सवाना के मोकोलोडी नेचर रिजर्व में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने भारत और बोत्सवाना के विशेषज्ञों द्वारा घांजी क्षेत्र से पकड़े गए चीतों को क्वारंटाइन सेंटर में छोड़े जाने का साक्षी बने।
राष्ट्रपति मुर्मु के आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से साझा किए गए पोस्ट में कहा गया —
“भारत-बोत्सवाना वन्यजीव संरक्षण साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।”
राजनयिक संबंधों का नया अध्याय
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु ने गैबोरोन स्थित मोकोलोडी नेचर रिजर्व का दौरा किया और राष्ट्रपति बोको से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने भारत-बोत्सवाना के बढ़ते सहयोग पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि यह क्षण और भी ऐतिहासिक है क्योंकि दोनों देश वर्ष 2026 में अपने राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग में मजबूती
गैबोरोन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि बोत्सवाना में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और बोत्सवाना डायमंड सेक्टर में मजबूत साझेदार हैं और अब यह सहयोग प्रौद्योगिकी, रक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए क्षेत्रों तक विस्तृत हो रहा है।
“भारत एक परिवर्तनकारी दौर में” — राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा —
“भारत एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। हमारी युवा और प्रतिभाशाली आबादी, सशक्त अर्थव्यवस्था और नवाचार की भावना हमें 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसी पहलें भारत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा रही हैं।
बोत्सवाना द्वारा भारत को आठ चीतों का उपहार केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि भारत की “प्रोजेक्ट चीता” पहल को नई गति देने वाला ऐतिहासिक कदम है। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच पर्यावरणीय, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और सुदृढ़ करेगी।

