स्व सहायता समूहों से रेडी टू इट छिने जाने के निर्णय से महिलओं में भारी आक्रोश,सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर रही है समूह से जुड़ी महिलाएं।

छत्तीसगढ़ में चल रही पूरक पोषण आहार व्यवस्था के तहत टेक होम राशन में रेडी टू ईट फूड के निर्माण

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सारंगढ़ में फिर सक्रीय हुए बिचौलिये, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में अपात्रो को पात्र बना कर सरकार को लगा रहे हैं लाखो का चुना

सारंगढ़ : किसानों के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

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प्रधान आरक्षक ओंकार राजपूत का बलौदाबजार सिटी कोतवाली स्थानान्तरण, थाना प्रभारी ने रखा विदाई समारोह

सरसींवा थाने मे पदस्थ ओंकार सिंह राजपूत के स्थानान्तरण को लेकर सरसींवा थाना प्रभारी राजेश साहू के द्वारा विदाई समारोह

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परसदा बड़े गौठान में धूमधाम से मनाया गया गोवर्धन पूजा

सारंगढ़!! 5 नवंबर गोवर्धन पूजा पूरे छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया गया प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा

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सच्ची घटना पर आधारित।तमिल सुपरस्टार सूर्या की ‘जय भीम’ आपको झकझोर कर रख देगी !

जय भीम… ये दो शब्द अपने आप में वंचितों–शोषितों के संघर्ष और आत्मसम्मान की लड़ाई को बयां करने के लिए काफी है क्योंकि जय भीम सिर्फ नारा नहीं बल्कि ज़ुल्म के खिलाफ विद्रोह का नाम है। इसी कड़ी में तमिल सिनेमा जगत से एक शानदार फिल्म रिलीज़ हो चुकी है जिसका नाम है जय भीम… लाइट्स, कैमरा, कास्ट के इस एपिसोड में हम रिव्यू करने वाले हैं तमिल सुपरस्टार सूर्या की फिल्म जय भीम को, तो आइये शुरू करते हैं।  क्या जय भीम फिल्म वाकई देखने लायक है? मुझे तो इस फिल्म का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था इसलिए रात को जैसे ही फिल्म अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई, मैंने तुरंत देख डाली। लेकिन क्या जय भीम फिल्म वाकई देखने लायक है? क्या है फिल्म की कहानी और क्यों आपको ये फिल्म देखनी चाहिए? आगे आपको इन सभी सवालों के जवाब मिलने वाले हैं। तो सबसे पहले बात करते हैं फिल्म की कहानी की। फिल्म की कहानी क्या है ? फिल्म में साल 1995 के दौरान तमिलनाडु में होने वाले जातीय उत्पीड़न और पुलिसिया बर्बरता को दिखाया गया है। ये फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है… मतलब फिल्म में जिस तरह की दरिंदगी दलित–आदिवासियों के साथ होते दिखाई गई है, वैसी ही हैवानियत हो चुकी है और आज भी होती है। इसलिए इसे सिर्फ मात्र एक संयोग टाइप काल्पनिक कहानी मत समझिएगा। फिल्म को देखते हुए आपको वो पीड़ा महसूस होगी जो असंख्य दलित–आदिवासी हर रोज़ सह रहे हैं। बात फिल्म की कहानी की करें तो ‘जय भीम‘ इरुलुर आदिवासी समुदाय के एक जोड़े सेंगगेनी और राजकन्नू की कहानी है। इरुलुर समुदाय के लोग सांप और चूहे पकड़ने का काम करते हैं। राजकन्नू को चोरी के झूठे आरोप में पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और इसके बाद वो पुलिस हिरासत से लापता हो जाता है। उसकी पत्नी उसे ढूंढने के लिए संघर्ष करती है। सूर्या ने चंद्रू नाम के वकील का किरदार निभाया है जो कानून के ज़रिए मज़लूमों की मदद करना अपना मिशन समझता है। जाति और सिस्टम का क्रूर चेहरा  फिल्म का पहला ही सीन आपको खींच लेता है। फिल्म की शुरुआत होती है जेल के बाहर से जहां कुछ कैदी अपनी सज़ा काटकर रिहा हो रहे होते हैं। लेकिन जेल के बाहर खड़ा जेलर हर कैदी से उसकी जाति पूछता है। जिसकी जाति दलित, उसे अलग लाइन में खड़ा कर दिया जाता है और सवर्ण जाति के कैदी अपनी जाति बताकर चले जाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसा क्यों हो रहा है। दरअसल इस सीन में दिखाया गया है कि आसपास के थानों से पुलिस वाले अपनी गाड़ियां लेकर यहां आए हुए हैं। उन्हें अपना रिकॉर्ड सुधारने और प्रमोशन के लिए कुछ अपराधी चाहिए, जिनपर वो झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल में डाल सकें या उनका फेक एनकाउंटर करके मेडल लेकर वर्दी पर एक सितारा और बढ़ा सकें। जेलर इन दलित कैदियों को ऐसे बांट देता है जैसे कोई कसाई बचे हुए गोश्त को कुत्तों के सामने फेंक देता है। आपको सुनने में अटपटा जरूर लग सकता है लेकिन भारत में लाखों दलित–आदिवासियों के साथ अक्सर इस तरह की ज्यादती होती

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छिंद आशा ग्राम संगठन के महिलाओं द्वारा निर्मित मोमबत्तियों से दिवाली होगा रोशन।

सारंगढ़ : यूं तो कोविड-19 ने बहुतेरे जख्म दिए हैं पर आत्मनिर्भरता को भी बल मिला है। जी हां, जनपद

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भीम आर्मी छग का प्रदेश स्तरीय बैठक रायपुर में सम्पन्न

प्रदेश अध्यक्ष ने लिए संभाग व जिला अध्यक्षों के साथ बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष की छत्तीसगढ़ आगमन की तैयारी के लिएभीम

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नाबालिक से दुष्कर्म कर फरार चल रहे तीसरे आरोपी को भी सरसींवा पुलिस ने भेजा जेल।

बिलाइगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंड्रिपाली मे एक नाबालिग युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। जहाँ आरोपियों द्वारा नाबालिग

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